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चुपके-चुपके ईरान की ताकत बढ़ा रहा है रूस? सामने आई अमेरिका को परेशान करने वाली खबर

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 02, 2026 08:19 am IST,  Updated : Sep 02, 2026 09:21 am IST

रूस पर ईरान को गुप्त रूप से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद देने का आरोप लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, C430L नाम का यह प्रोग्राम 2023 में शुरू हुआ और इसमें रूसी मिसाइल विशेषज्ञ शामिल हैं।

Russia Iran Military Cooperation, Iran Supersonic Cruise Missile- India TV Hindi
मसूद पेजेश्कियन, व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप। Image Source : X/@MFA_RUSSIA/AP

Highlights

  • रूस पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक देने की गुप्त मदद का आरोप लगा है।
  • रैमजेट तकनीक से ईरानी मिसाइलें तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ सकती हैं।
  • नई मिसाइल क्षमता खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ा रणनीतिक खतरा बन सकती है।

अमेरिका और ईरान में जारी जंग के बीच एक बेहद ही अहम खबर सामने आई है। रूस पर चुपके-चुपके ईरान को बेहद संवेदनशील सैन्य तकनीक गुप्त रूप से देने का आरोप लगा है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस पिछले कई सालों से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने में मदद कर रहा है। इस गुप्त कार्यक्रम का कोडनेम C430L बताया गया है और इसकी शुरुआत 2023 में हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यक्रम में रूस के अनुभवी मिसाइल एक्सपर्ट शामिल हैं। बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमले किए हैं, जिसके बाद क्षेत्र में संघर्ष के फिर से बढ़ने की आशंका है

क्या है इस पूरे प्रोग्राम का मकसद?

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोग्राम का मकसद ईरान को रैमजेट इंजन तकनीक विकसित करने में मदद करना है। इस तकनीक से क्रूज मिसाइलें आवाज की गति से कई गुना तेज उड़ सकती हैं। लीक हुई रूसी बातचीत, यात्रा रिकॉर्ड और सैन्य पेटेंट के विश्लेषण के आधार पर फाइनेंशियल टाइम्स ने यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट का दावा है कि अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ संघर्ष के दौरान भी यह कार्यक्रम जारी रहा।

ईरान हासिल करना चाहता था ऐसी तकनीक

ईरानी मिसाइलों के विशेषज्ञ और Conflict Armament Research के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा,

'यह रूस की ओर से बेहद रणनीतिक और संवेदनशील सैन्य तकनीक का हस्तांतरण है, जिसे ईरान दशकों से हासिल करना चाहता था। इस तरह के कार्यक्रम के लिए रूस में सबसे ऊंचे राजनीतिक स्तर से मंजूरी की जरूरत होगी।'

रिपोर्ट के मुताबिक, रैमजेट तकनीक का इस्तेमाल एंटी-शिप यानी जहाज रोधी और जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों में किया जा सकता है। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की खासियत यह है कि वे बहुत तेज गति से उड़ने के साथ कम ऊंचाई पर भी उड़ सकती हैं। इससे एयर डिफेंस सिस्टम को उन्हें पहचानने और रोकने के लिए कम समय मिलता है।

अमेरिकी नेवी के जहाजों के लिए बड़ा खतरा

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, ईरान रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम बना चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि रूस की मदद से विकसित कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरान ने तैनात कर दी है। पूर्व CIA सैन्य विश्लेषक और अब James Martin Center for Nonproliferation Studies से जुड़े जिम लैम्सन ने कहा,

'ईरान के लिए यह एक नई क्षमता वाला रणनीतिक हथियार सिस्टम होगा, जो अमेरिकी नेवी के जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।'

लीक हुई बातचीत से यह भी संकेत मिलता है कि इस कार्यक्रम को लेकर चर्चा इस गर्मी तक जारी थी।

रूस और ईरान के रिश्ते लगातार हो रहे मजबूत

रूस और ईरान के बीच पिछले कुछ वर्षों में सैन्य और रणनीतिक संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। ईरान ने रूस को शाहेद हमलावर ड्रोन दिए हैं, जिनका यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती रही है। ईरान ने रूस को अपने देश में इन ड्रोन के उत्पादन की व्यवस्था स्थापित करने में भी मदद की है। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, यूक्रेन और पश्चिमी देशों के अधिकारियों ने रूस पर ईरान को उसके अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के दौरान युद्धक्षेत्र से जुड़ी मदद देने का आरोप भी लगाया है। इसमें सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन से जुड़ी मदद और हथियारों के कलपुर्जे शामिल होने का दावा किया गया है।

अमेरिका के लिए क्यों बड़ा झटका है ये खबर?

अगर रूस की मदद से ईरान सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की विश्वसनीय क्षमता हासिल कर लेता है, तो इससे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं की सुरक्षा चुनौती बढ़ सकती है। इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जहाज और अन्य रक्षा संसाधन तैनात हैं। तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलें मौजूदा एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए प्रतिक्रिया का समय कम कर सकती हैं। खासकर एंटी-शिप क्षमता विकसित होने पर अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रूस की मदद से बनी ऐसी कोई मिसाइल ईरान ने तैनात कर दी है। (ANI से इनपुट्स के साथ)

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